संपादक विमल कुमार



सतनामी समाज के गौरव को सम्मानित करने जुटे नागरिक, संजय आजाद बोले—यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और हर्ष का विषय
बांकीमोंगरा। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के वार्ड क्रमांक 6 स्थित शांतिनगर सामुदायिक भवन में 6 सितंबर 2026 को राज्यपाल, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती कौशिल्या खुराना के सम्मान में समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन समाजसेवी संजय आजाद एवं खुराना परिवार द्वारा किया गया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को राजभवन रायपुर में राज्यपाल द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित की गईं श्रीमती कौशिल्या खुराना के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के नागरिकों एवं समाज के लोगों ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी संजय आजाद ने कहा कि “श्रीमती कौशिल्या खुराना का राज्यपाल द्वारा सम्मानित होना केवल उनके परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे सतनामी समाज, बांकीमोंगरा क्षेत्र और हम सभी के लिए गौरव एवं हर्ष का विषय है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में जिस समर्पण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।”
गांव से शुरू हुआ सफर, शिक्षा को बनाया जीवन का उद्देश्य
सम्मान समारोह में श्रीमती कौशिल्या खुराना ने अपने जीवन संघर्ष, शिक्षकीय सफर और उपलब्धियों को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि उनका जन्म छोटे से गांव सिंघनपुर में श्री कृपाराम निराला एवं श्रीमती तिहारिन बाई निराला के परिवार में हुआ। उनके पिता एसईसीएल में डंपर ऑपरेटर रहे, जबकि उनकी माता गृहिणी होने के साथ रामायण गायिका भी थीं।
वर्ष 1998 में शिक्षाकर्मी वर्ग-2 के रूप में हाई स्कूल श्यांग से उनके शिक्षकीय जीवन की शुरुआत हुई। दूरस्थ क्षेत्र में कठिन परिस्थितियों के बीच करीब आठ वर्षों तक उन्होंने पूरी निष्ठा से बच्चों को शिक्षा दी। इसके बाद वर्ष 2007 में व्याख्याता के रूप में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अरदा में पदस्थापित हुईं।
शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने साहित्य, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी करीब 200 रचनाएं सामने आ चुकी हैं और लगभग 35 रचनाएं साझा संकलनों में प्रकाशित होने की जानकारी दी गई।
नवाचारपूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों के लिए समर्पण
श्रीमती खुराना ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए वे कहानी, एकांकी, रोल-प्ले, खेल गतिविधियों, सस्वर वाचन और आर्ट एंड क्राफ्ट जैसी विधियों का प्रयोग करती रही हैं। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लेकर उन्हें विशेष मार्गदर्शन देना भी उनकी शिक्षण शैली का हिस्सा रहा है।
उन्होंने बताया कि लगभग 10 वर्षों से कक्षा 12वीं का वार्षिक परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है। उनके द्वारा पढ़ाए गए अनेक विद्यार्थी आज एमबीबीएस, मेडिकल ऑफिसर, इंस्पेक्टर, शिक्षक सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने स्वयं प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ अन्य शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया है। उन्हें शिक्षा, साहित्य, सामाजिक जागरूकता एवं मंच संचालन सहित विभिन्न क्षेत्रों में अब तक लगभग 400 सम्मान-पत्र प्राप्त होने की जानकारी भी कार्यक्रम में साझा की गई
मंच पर मौजूद रहे ये अतिथि
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यपाल पुरस्कृत श्रीमती कौशिल्या खुराना रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथि वार्ड क्रमांक 6 की पार्षद श्रीमती तालिका लालू साहू रहीं।
मंचस्थ अतिथियों में संजय आजाद, श्रीमती सुनीता पाटले, प्रेमलाल नारंग, जी.एल. मात्रे, हरिशंकर दिवाकर, के.पी. पाटले, श्यामलाल मनहर, सोनिया कुर्रे, लेखराम निराला एवं मिठाईलाल बघेल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन रामप्रसाद (बबलू) डहरिया ने किया।
इस अवसर पर अमृता रानाडे, चंद्रकला बघेल, शरिया लहरें, मनीषा लहरें, अनुसूइया, राखी विंध्यराज, शीतल नारंग, शरिता आजाद, सुनैना शर्मा, तिमाला, ऊषा साहू, स्नेहा बघेल, स्वेक्षा, ईरा, उर्मिला, नीबा, हर्षिता, लाला साहू, श्रद्धा खुराना एवं भूपेश खुराना सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने श्रीमती कौशिल्या खुराना को राज्यपाल से प्राप्त सम्मान के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि कठिन परिस्थितियों में निरंतर मेहनत, समर्पण और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
