संपादक विमल कुमार


SECL की भूमिगत खदान से बढ़ा जमीन धंसने का खतरा, बड़े गड्ढे ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
बांकीमोंगरा, कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बांकीमोंगरा क्षेत्र में भूमिगत कोयला खनन का असर अब जमीन की सतह पर भी दिखाई देने लगा है। बांकीमोंगरा के 2 नंबर क्षेत्र में एक खेत के धंसने और जमीन के भीतर बड़ा गड्ढा बनने की तस्वीर सामने आई है। खेत की जमीन धंसने से आसपास रहने वाले ग्रामीणों के साथ-साथ खेतों में आने-जाने वाले मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
तस्वीर में खेत के बीच जमीन का एक बड़ा हिस्सा नीचे धंसा हुआ दिखाई दे रहा है। धंसे हुए स्थान के नीचे गहरी सुरंगनुमा जगह नजर आ रही है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जमीन के नीचे पुरानी अथवा भूमिगत खनन गतिविधियों का प्रभाव सतह तक पहुंच सकता है। हालांकि, जमीन धंसने का वास्तविक कारण, गहराई और प्रभावित भूमि का क्षेत्रफल संबंधित विभाग की तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
खेत धंसने से किसानों की बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के लिए खेत केवल खेती की जमीन नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में खेत का अचानक धंसना किसान परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि इसी तरह जमीन के अन्य हिस्सों में भी धंसाव होता है तो खेती प्रभावित होने के साथ-साथ ग्रामीणों के आवागमन और आसपास के खेतों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि खुले खेत में बने ऐसे धंसे हुए हिस्से को दूर से हमेशा आसानी से पहचानना संभव नहीं होता। बरसात के मौसम में घास और पानी के कारण जमीन की वास्तविक स्थिति और भी स्पष्ट नहीं दिखाई दे सकती। ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीणों के साथ-साथ खेतों में घूमने वाले पशु भी अनजाने में धंसे हुए हिस्से की ओर जा सकते हैं।
मवेशियों के लिए भी गंभीर खतरा
ग्रामीण इलाकों में खेतों के आसपास मवेशियों का आना-जाना सामान्य बात है। यदि धंसा हुआ हिस्सा बिना सुरक्षा घेराबंदी के खुला रहता है तो किसी भी समय पशु उसमें गिर सकते हैं। इसी तरह बच्चे या ग्रामीण भी अनजाने में दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग तत्काल मौके का निरीक्षण करे और धंसे हुए क्षेत्र के आसपास सुरक्षा घेराबंदी, चेतावनी बोर्ड तथा आवश्यक बैरिकेडिंग कराई जाए, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
भूमिगत खनन वाले क्षेत्रों में सतह धंसने का मुद्दा गंभीर
कोरबा जिले में लंबे समय से कोयला खनन गतिविधियां संचालित होती रही हैं और बांकीमोंगरा क्षेत्र भी भूमिगत कोयला खनन से जुड़ा रहा है। पूर्व में बांकीमोंगरा कोल परियोजना में भूमिगत खनन गतिविधियों का उल्लेख सामने आया है।
SECL की ओर से वैज्ञानिक खदान बंदी की प्रक्रिया में भूमि धंसाव से प्रभावित क्षेत्रों की मरम्मत और सुरक्षा उपायों का भी उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट है कि भूमिगत खनन वाले क्षेत्रों में सतह की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है।
ग्रामीणों ने उठाए सुरक्षा को लेकर सवाल
बांकीमोंगरा के 2 नंबर में सामने आई इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर खेत की जमीन किस वजह से धंसी? क्या इसके नीचे पुरानी भूमिगत खदान की गैलरी है? क्या आसपास के अन्य खेतों में भी ऐसी स्थिति बनने की संभावना है? धंसे हुए हिस्से की गहराई कितनी है और क्या यह क्षेत्र ग्रामीणों तथा मवेशियों के लिए सुरक्षित है?
इन सवालों का जवाब तकनीकी सर्वे और मौके की जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
प्रशासन और SECL से तत्काल जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित प्रशासन, खनन विभाग और SECL के अधिकारियों को मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करना चाहिए। जमीन धंसने वाले क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि धंसाव का कारण क्या है तथा भविष्य में इसके आसपास और जमीन धंसने की संभावना है या नहीं।
साथ ही प्रभावित किसान की जमीन का भी परीक्षण कराकर आवश्यक सुरक्षा और राहत संबंधी कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि धंसा हुआ क्षेत्र सार्वजनिक अथवा ग्रामीण आवागमन के नजदीक है तो वहां तत्काल बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना जरूरी है।
बड़ा हादसा होने से पहले उठाए जाएं कदम
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते सुरक्षा व्यवस्था की जाए। खेत में बने इस गहरे धंसाव के आसपास बच्चों, किसानों और मवेशियों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित खनन प्रबंधन को तत्काल स्थल निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
फिलहाल बांकीमोंगरा के 2 नंबर में किसान के खेत में दिखाई दे रहा यह धंसाव स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक मौके की जांच करता है और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
