संपादक विमल कुमार



बांकीमोंगरा। शहर और आसपास के लोगों के लिए कभी सुकून के कुछ पल बिताने का ठिकाना रहा एसईसीएल गार्डन इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। जिस जगह को लोगों के मनोरंजन, सुबह की सैर और बच्चों के लिए खुले वातावरण के तौर पर विकसित किया गया था, वहां अब व्यवस्थाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है। गार्डन की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि लंबे समय से इसके नियमित रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
क्षेत्र में लगातार बढ़ती आबादी के बीच सार्वजनिक स्थानों की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में मौजूद पार्क और गार्डन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं, लेकिन बांकीमोंगरा का यह गार्डन वर्तमान में अपनी संभावनाओं के अनुरूप लोगों को सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। परिसर के कई हिस्सों में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है और कचरे के कारण वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
पार्क है, लेकिन सुविधाओं का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि गार्डन का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब वहां नियमित साफ-सफाई के साथ-साथ जरूरी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए। केवल गार्डन का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी देखभाल, हरियाली, बैठने की व्यवस्था और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाए रखना भी जरूरी है।
लोगों के मुताबिक अगर समय-समय पर परिसर की सफाई होती रहे और छोटी-मोटी खराबियों को तत्काल ठीक कराया जाए तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। लेकिन लंबे समय तक छोटी समस्याओं की अनदेखी होने पर वही समस्याएं धीरे-धीरे बड़ी परेशानी का रूप ले लेती हैं।
कचरा बना सबसे बड़ी चिंता
गार्डन में यहां-वहां पड़ा कचरा सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींच रहा है। सार्वजनिक स्थल होने के कारण यहां आने वाले लोगों की संख्या रहती है, ऐसे में कचरा उठाने की नियमित व्यवस्था जरूरी हो जाती है। सफाई व्यवस्था कमजोर पड़ने से गंदगी जमा होती जाती है और धीरे-धीरे पूरा परिसर प्रभावित होने लगता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गार्डन में आने वाले लोग भी अपनी जिम्मेदारी समझें और कचरा इधर-उधर न फेंकें। इसके साथ ही संबंधित प्रबंधन को भी नियमित सफाई और कचरा उठाव की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। दोनों स्तरों पर जिम्मेदारी निभाने से ही सार्वजनिक स्थल को बेहतर रखा जा सकता है।
शाम के समय बढ़ती है लोगों की आवाजाही
बांकीमोंगरा जैसे क्षेत्र में लोगों के लिए मनोरंजन और खुले वातावरण वाले स्थान सीमित हैं। ऐसे में शाम के समय परिवारों, युवाओं और बच्चों के लिए गार्डन उपयोगी साबित हो सकता है। लेकिन मौजूदा स्थिति के कारण लोग यहां आने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गार्डन को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थल बन सकता है। यहां हरियाली को बढ़ाया जा सकता है, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की जा सकती है और बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र तैयार किया जा सकता है।
सिर्फ सफाई नहीं, पूरी व्यवस्था सुधारने की जरूरत
लोगों की मांग है कि गार्डन की समस्या को केवल कचरा हटाने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पूरे परिसर का निरीक्षण कर यह देखा जाना चाहिए कि कहां-कहां मरम्मत की आवश्यकता है और किन सुविधाओं को दोबारा विकसित किया जा सकता है।
गार्डन की नियमित निगरानी, पौधों की देखभाल, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और सुरक्षा जैसे विषयों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यदि इन सभी पहलुओं को एक साथ लेकर काम किया जाए तो गार्डन की तस्वीर काफी हद तक बदली जा सकती है।
जिम्मेदारों से कार्रवाई की उम्मीद
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एसईसीएल क्षेत्र में मौजूद इस सार्वजनिक स्थल को उपेक्षा के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। गार्डन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए संबंधित प्रबंधन को मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
लोगों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक संपत्ति का निर्माण करने के बाद उसका रखरखाव उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि समय पर ध्यान दिया जाए तो मामूली खर्च और नियमित निगरानी से किसी भी परिसर को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है।
बेहतर हो सकता है गार्डन का भविष्य
बांकीमोंगरा के नागरिक चाहते हैं कि एसईसीएल गार्डन को फिर से व्यवस्थित और उपयोगी बनाया जाए। यदि साफ-सफाई के साथ बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए और नियमित रखरखाव की व्यवस्था बनाई जाए तो यह गार्डन एक बार फिर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
फिलहाल गार्डन की स्थिति यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि जिस सार्वजनिक स्थान से लोगों को सुविधा और स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए, उसकी देखरेख को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। अब देखना होगा कि संबंधित जिम्मेदार इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और गार्डन की स्थिति सुधारने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाते हैं।
