संपादक विमल कुमार








17 दुकानों का बाजार, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नाकामी ! कहीं कपड़े के पर्दे, कहीं सटा कर बनाई गई दुकानें, न पानी-रेत की व्यवस्था और न दमकल-एम्बुलेंस की मौजूदगी; आखिर किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
त्योहारी सीजन में लोगों की खुशियों के लिए सजाया गया पटाखा बाजार कहीं किसी बड़ी अनहोनी का कारण न बन जाए! पटाखों की बिक्री के लिए बनाए गए अस्थायी बाजार में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किए जाने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। यहां एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसे इंतजाम नजर आ रहे हैं, जो अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। हैरानी की बात यह है कि बाजार में कुल 17 दुकानें संचालित हो रही हैं, लेकिन बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी सवालों के घेरे में हैं।
3 मीटर की दूरी का नियम ताक पर, कतार में सटाकर बनाई गई दुकानें
विस्फोटक अधिनियम, 1884 और विस्फोटक नियम, 2008 के तहत पटाखों के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। अस्थायी पटाखा दुकानों के बीच निर्धारित दूरी बनाए रखना अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
लेकिन यहां स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। आरोप है कि दुकानों को बिना पर्याप्त अंतराल के कतारबद्ध तरीके से बनाया गया है। दो दुकानों के बीच निर्धारित दूरी का पालन नहीं किए जाने से आग लगने की स्थिति में एक दुकान से दूसरी दुकान तक आग फैलने का गंभीर खतरा हो सकता है।
कपड़े के पर्दों से दुकानें, आग के बीच खड़ा किया जा रहा खतरा!
नियमों के मुताबिक पटाखा दुकानों के निर्माण में अग्निरोधक सामग्री और सुरक्षित संरचना का ध्यान रखना आवश्यक है। लेकिन यहां दुकानों में कपड़े के पर्दों और अन्य ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
इतना ही नहीं, दुकानों के प्रवेश द्वार भी आमने-सामने बनाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि किसी दुकान में आग लगती है या पटाखों में विस्फोट होता है, तो आसपास की दुकानों और वहां मौजूद लोगों के लिए स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
17 दुकानों के बाजार में सिर्फ 6 के सामने CO2 अग्निशामक यंत्र!
सुरक्षा व्यवस्था की सबसे गंभीर तस्वीर अग्निशमन उपकरणों को लेकर सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार, बाजार में कुल 17 दुकानें हैं, लेकिन इनमें से केवल 6 दुकानों के सामने CO2 अग्निशामक यंत्र दिखाई दे रहे हैं।
वहीं पानी से भरी बाल्टियां और सूखी रेत की बाल्टियां भी नजर नहीं आ रही हैं। जबकि आग पर शुरुआती नियंत्रण के लिए ऐसे इंतजाम बेहद जरूरी हैं।
सवाल यह है कि शेष दुकानों में आग से निपटने की क्या व्यवस्था है? क्या केवल कुछ दुकानों के सामने अग्निशामक यंत्र रख देने से पूरे बाजार की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी?
न एंबुलेंस, न दमकल! हादसा हुआ तो कौन संभालेगा मोर्चा?
पटाखा बाजार जैसे संवेदनशील स्थान पर आपातकालीन व्यवस्था का होना बेहद जरूरी है। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए दमकल वाहन, प्राथमिक चिकित्सा और एंबुलेंस जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन मौके पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार न तो एंबुलेंस दिखाई दे रही है और न ही दमकल वाहनों की मौजूदगी नजर आ रही है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि बाजार में आग लगने या पटाखों में विस्फोट जैसी घटना होती है तो तत्काल राहत और बचाव की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?
दुकानों के सामने ही पटाखों का प्रदर्शन, सुरक्षा नियमों की अनदेखी?
नियमों के तहत पटाखा बिक्री स्थल के आसपास धूम्रपान और खुली आग पर सख्त प्रतिबंध रहता है। बीड़ी, सिगरेट, मोमबत्ती, दीपक, अगरबत्ती और अन्य ज्वलनशील गतिविधियों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है। नो स्मोकिंग जैसे चेतावनी बोर्ड भी स्पष्ट रूप से लगाए जाने चाहिए।
लेकिन यहां स्थिति को लेकर गंभीर सवाल हैं। आरोप है कि दुकानों के सामने ही कुछ संचालक पटाखे फोड़कर ग्राहकों को सैंपल के तौर पर दिखाते नजर आ रहे हैं। यदि यह गतिविधि बिक्री स्थल पर ही हो रही है, तो यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।
नाबालिगों के हाथों में दुकान की जिम्मेदारी?
पटाखा दुकानों में नाबालिग बच्चों को संचालन करते देखे जाने की भी बात सामने आई है। विस्फोटक सामग्री के कारोबार में प्रशिक्षित और जिम्मेदार वयस्कों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि नाबालिगों को दुकान संचालन या विस्फोटक सामग्री के प्रबंधन में लगाया जा रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।
प्रशासन की निगरानी कहां? हादसे के बाद होगी कार्रवाई या पहले?
सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और संबंधित लाइसेंसिंग अधिकारियों की निगरानी को लेकर है। पटाखा बाजार में दुकानें संचालित होने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच और आवश्यक व्यवस्थाओं का सत्यापन किसने किया?
क्या सभी दुकानों के लाइसेंस और अनुमति की जांच की गई है? क्या फायर सेफ्टी के इंतजामों का निरीक्षण हुआ है? क्या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तैयार है?
हंगामा न्यूज के ये सवाल जनसुरक्षा से जुड़े हैं। पटाखों का कारोबार मुनाफे के लिए हो सकता है, लेकिन आम नागरिकों की जिंदगी दांव पर लगाकर नहीं। प्रशासन को तत्काल मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच करनी चाहिए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
क्योंकि आग लगने के बाद जांच और मुआवजे की बातें करने से बेहतर है कि हादसा होने से पहले सुरक्षा सुनिश्चित कर ली जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर सवालों पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जाएगा।
