संपादक विमल कुमार

नगर पालिका परिषद चांपा में स्वर्गीय हरदीप सिंह के मृत्यु प्रमाण पत्र में उनकी पत्नी जसवीर कौर का नाम दर्ज नहीं किया गया था। अपने पति के मृत्यु प्रमाण पत्र में नाम दर्ज करवाने के लिए जसवीर कौर ने नगर पालिका के कई चक्कर लगाए, लेकिन बार-बार प्रयास करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
जब इस मामले की जानकारी समाज सेविका डिंकी कौर को मिली तो उन्होंने पीड़ित महिला का साथ देने का निर्णय लिया। उन्होंने जसवीर कौर को अकेला नहीं छोड़ा और लगातार संबंधित अधिकारियों के समक्ष उसकी बात रखने में सहयोग किया।
पहले नगर पालिका में प्रयास किया गया। वहां सुनवाई नहीं होने पर कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन दिलवाया गया। कलेक्टर द्वारा मामले को एसडीएम के पास भेजे जाने के बाद, समाज सेविका डिंकी कौर स्वयं जसवीर कौर को लेकर एसडीएम के समक्ष पहुंचीं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री की टोल-फ्री सेवा 1076 में शिकायत दर्ज कराने के लिए भी मार्गदर्शन दिया गया।
लगातार प्रयासों और अधिकारियों के समक्ष मामला उठाए जाने के बाद आखिरकार हरदीप सिंह के मृत्यु प्रमाण पत्र में उनकी पत्नी जसवीर कौर का नाम दर्ज हो सका।
यह सिर्फ एक महिला के दस्तावेज में नाम जुड़ने की बात नहीं है, बल्कि यह उस महिला को उसके कानूनी और पारिवारिक अधिकार की पहचान दिलाने की लड़ाई थी।
👏 डिंकी कौर के लिए विशेष शब्द
“समाज सेवा केवल भाषण देने का नाम नहीं है, बल्कि जब किसी जरूरतमंद की आवाज दब जाए, तब उसके साथ खड़े होकर उसे न्याय दिलाने का नाम समाज सेवा है। समाज सेविका डिंकी कौर ने जसवीर कौर के मामले में यही करके दिखाया। कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद जब महिला की सुनवाई नहीं हुई, तब डिंकी कौर ने हार नहीं मानी और लगातार उसके साथ खड़ी रहीं। उनकी मेहनत और दृढ़ता के कारण आखिरकार पीड़ित महिला को न्याय मिला। ऐसे जनहित के कार्यों के लिए डिंकी कौर का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।”
⚠️ एफिडेविट की भी हो निष्पक्ष जांच
इस मामले में एक गंभीर प्रश्न यह भी उठता है कि मृतक हरदीप सिंह की पत्नी जसवीर कौर का नाम मृत्यु प्रमाण पत्र से हटे रहने की स्थिति कैसे बनी और इसके लिए जो एफिडेविट प्रस्तुत किया गया, वह किन लोगों के कहने या सहयोग से तैयार हुआ?
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि जानबूझकर गलत जानकारी देकर, वास्तविक पत्नी का नाम छिपाकर अथवा किसी मिलीभगत के माध्यम से एफिडेविट तैयार करवाया गया, तो संबंधित सभी व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
विशेष रूप से यदि किसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा अन्य शासकीय/संबंधित व्यक्ति ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गलत जानकारी या गलत एफिडेविट तैयार करवाने में सहयोग किया है, तो उसकी भी विभागीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
किसी विधवा महिला के अधिकार और पहचान के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
“एक महिला की आवाज को दबाने की कोशिश हुई, लेकिन डिंकी कौर उसके साथ खड़ी हुईं। संघर्ष लंबा था, लेकिन अंततः सच की जीत हुई और जसवीर कौर का नाम उनके पति के मृत्यु प्रमाण पत्र में दर्ज हुआ।”
