संपादक विमल कुमार

कोरबा। लगातार हो रही बारिश और जलाशय में पानी की आवक बढ़ने के बाद मिनीमाता बांगो जलाशय का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जलाशय में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रबंधन ने पानी की निकासी बढ़ा दी है। वर्तमान में कुल 7 गेट खोलकर करीब 25,000 क्यूसेक पानी जलाशय से बाहर छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इससे नदी के बहाव क्षेत्र और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

जानकारी के अनुसार, जलाशय में लगातार पानी की आवक बढ़ने के कारण पहले चरण में 5 गेट खोले गए थे। इसके बाद जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर 2 और गेट खोल दिए, जिससे अब कुल 7 गेट से पानी की निकासी की जा रही है। जलाशय से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी के जलस्तर और बहाव पर भी इसका असर पड़ सकता है।

लगातार बढ़ रही पानी की आवक
क्षेत्र में हो रही बारिश के चलते जलाशय के कैचमेंट एरिया से लगातार पानी पहुंच रहा है। पानी की आवक में वृद्धि के साथ जलाशय के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। जल संसाधन विभाग और संबंधित अमला स्थिति की निगरानी कर रहा है। जलाशय की सुरक्षा और जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यकता के अनुसार गेटों से पानी की निकासी बढ़ाई या घटाई जा सकती है।

करीब 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी में पानी का बहाव तेज होने की संभावना है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों, किसानों, मछुआरों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक रूप से नदी के किनारे या तेज बहाव वाले स्थानों पर न जाएं।

निचले इलाकों में रहने वालों को सतर्क रहने की जरूरत
जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद इसका प्रभाव नदी के निचले हिस्सों में देखने को मिल सकता है। अचानक पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में नदी किनारे बने रास्तों, छोटे पुल-पुलियों और निचले हिस्सों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी और सूचनाओं को गंभीरता से लेना जरूरी है।

विशेष रूप से नदी किनारे खेती करने वाले किसानों और वहां आने-जाने वाले लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। खेतों, नदी घाटों और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से पहले पानी के बहाव की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है। तेज बहाव के दौरान नदी पार करने या पानी में उतरने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है।

जलाशय के जलस्तर पर लगातार निगरानी
मिनीमाता बांगो जलाशय में पानी की आवक और निकासी की स्थिति पर संबंधित विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों की नजर जलाशय के जलस्तर, इनफ्लो और आउटफ्लो पर बनी हुई है। बारिश और पानी की आवक की स्थिति को देखते हुए आगे भी गेटों की संख्या में बदलाव किया जा सकता है।

जलाशय के गेट खोले जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी नदी के आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर लोगों को सतर्क रहने तथा किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की जा रही है। लोगों से कहा गया है कि वे पानी से जुड़ी किसी भी सूचना के लिए प्रशासन और संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
किसानों और ग्रामीणों के लिए जरूरी सावधानी
जलाशय से पानी छोड़े जाने के कारण नदी के जलस्तर में वृद्धि होने की संभावना को देखते हुए किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। नदी के आसपास के खेतों और निचले क्षेत्रों में काम करने वाले किसान मौसम और जलस्तर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही गतिविधियां करें। पशुओं को भी नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की सलाह दी जा रही है।
वहीं मछुआरों और नदी में आवागमन करने वाले लोगों को भी फिलहाल विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। तेज बहाव के दौरान नाव या अन्य साधनों से नदी पार करने से बचना जरूरी है। प्रशासन की ओर से जारी किसी भी चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
स्थिति पर प्रशासन की नजर
मिनीमाता बांगो जलाशय से फिलहाल करीब 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बीच प्रशासन और जल संसाधन विभाग की नजर पूरे हालात पर बनी हुई है। जलाशय में पानी की आवक यदि आगे भी बढ़ती है तो जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए पानी की निकासी की मात्रा में परिवर्तन किया जा सकता है।
फिलहाल 7 गेटों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी के बहाव क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जलाशय के जलस्तर को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखना और संभावित खतरे को टालना है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे जाने से बचें, बच्चों को जलस्रोतों से दूर रखें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन को तत्काल सूचना दें।
बारिश और जलाशय में पानी की आवक को देखते हुए आने वाले घंटों में स्थिति में बदलाव संभव है। ऐसे में नागरिकों को लगातार मौसम और प्रशासनिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।
