संपादक विमल कुमार




बांकीमोंगरा। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में ‘पार्षद प्रतिनिधि’ की भूमिका को लेकर विवाद सामने आया है। जिला प्रशासन को दी गई शिकायत में राकेश पटेल और जगदीश पटेल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके द्वारा कथित तौर पर शासकीय कार्यों में हस्तक्षेप और लोगों से राशि मांगने के आरोपों की जांच की मांग की गई है।
पार्षद प्रतिनिधि आखिर कितनी सीमा तक अधिकृत?
शिकायतकर्ताओं का मुख्य सवाल यही है कि निर्वाचित पार्षद की ओर से प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति को शासकीय कार्यालयों और जनहित से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार किस सीमा तक है।
शिकायत में दावा किया गया है कि दोनों व्यक्ति स्वयं को पार्षद प्रतिनिधि बताते हुए नगर पालिका के कार्यों के अलावा ठेका, रोजगार, राशन कार्ड, पेंशन और SECL के L&R से जुड़े मामलों में भी सक्रिय रहते हैं।
वसूली के आरोप भी, जांच से सामने आएगी सच्चाई
शिकायतकर्ताओं ने आम लोगों से कथित तौर पर राशि की मांग अथवा वसूली किए जाने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायत के साथ दस्तावेज और फोटो-वीडियो साक्ष्य
शिकायतकर्ताओं के अनुसार आवेदन के साथ छत्तीसगढ़ राजपत्र क्रमांक 439, दिनांक 6 अगस्त 2026 की प्रति सहित अन्य दस्तावेज और कथित फोटो-वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। शिकायत में इन सभी सामग्रियों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
कई अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि
मामले की प्रतिलिपि SDM कटघोरा, नगर पालिका के संबंधित अधिकारियों और नगर पालिका अध्यक्ष बांकीमोंगरा सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने की बात सामने आई है। इससे मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आता दिखाई दे रहा है।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर आधारित है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि राकेश पटेल और जगदीश पटेल को किसी स्तर पर कोई अधिकृत जिम्मेदारी प्राप्त थी या नहीं और वे किन अधिकारों के तहत शासकीय मामलों में लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
अब प्रशासनिक जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर प्रशासन को पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
