संपादक विमल कुमार

कोरबा। लंबे समय से कोयला खनन गतिविधियों के बीच बसे बांकीमोंगरा क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति देने की मांग सामने आई है। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के एल्डरमैन जितेंद्र कुमार सिंह ने कलेक्टर को पत्र देकर क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप DMF से विशेष आर्थिक प्रावधान किए जाने की मांग की है।11 अगस्त को सौंपे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि बांकीमोंगरा और आसपास के इलाकों में वर्षों से खनन गतिविधियां संचालित होती रही हैं। ऐसे में खनन से प्रभावित क्षेत्र की आधारभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए DMF की योजनाओं में यहां के विकास को पर्याप्त प्राथमिकता मिलनी चाहिए।विकास कार्यों के लिए 100 करोड़ का प्रस्तावएल्डरमैन ने बांकीमोंगरा नगर पालिका क्षेत्र के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की DMF राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका सुझाव है कि क्षेत्र की जरूरतों का आकलन कर इस राशि को अलग-अलग चरणों में आवश्यक परियोजनाओं पर खर्च किया जाए।उन्होंने आगामी DMF कार्ययोजना में बांकीमोंगरा के लिए विशेष बजट प्रावधान करने और इसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की सूची में शामिल करने की मांग रखी है।खनन के प्रभाव का बनेगा आधारपत्र में क्षेत्र में लंबे समय से चल रही खनन गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन कराने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत पर्यावरण, जल व्यवस्था, सड़क, सामाजिक जीवन और अन्य बुनियादी ढांचे पर पड़े असर का सर्वे कराने की मांग की गई है।एल्डरमैन का कहना है कि सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि खनन प्रभावित क्षेत्र में किन समस्याओं का समाधान सबसे पहले किया जाना जरूरी है। इसी आकलन के आधार पर DMF की राशि का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है।पानी और सड़क से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य तक की जरूरतप्रस्ताव में क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। इनमें पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना, जलस्रोतों को बचाना, नाली और जल निकासी व्यवस्था सुधारना, सड़कों का उन्नयन, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था तथा विद्युत अधोसंरचना को मजबूत करना शामिल है।इसके साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों की सुविधाओं में विस्तार, स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन, खेल मैदान, युवाओं के लिए सुविधाएं तथा सामुदायिक भवनों के निर्माण की जरूरत भी बताई गई है।DMF में बांकीमोंगरा की स्थिति पर मांगा जवाबजितेंद्र कुमार सिंह ने केवल भविष्य की योजनाओं को लेकर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि अब तक DMF के तहत क्षेत्र को मिले लाभ का विवरण भी मांगा है।पत्र में पूछा गया है कि नगर पालिका क्षेत्र के लिए अब तक कितनी DMF राशि स्वीकृत हुई, कितनी राशि प्राप्त हुई और उस राशि से कितने विकास कार्यों को मंजूरी मिली। वर्तमान में कितनी राशि उपलब्ध है अथवा आगामी योजनाओं में कितनी राशि प्रस्तावित है, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।इसके अलावा उन्होंने यह स्पष्ट करने की मांग की है कि बांकीमोंगरा को DMF की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल किया गया है या नहीं।स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बने विकास की योजनाएल्डरमैन ने अपने पत्र के माध्यम से यह मुद्दा उठाया है कि खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र में विकास की योजनाएं केवल सामान्य आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए।उनका कहना है कि बांकीमोंगरा क्षेत्र ने लंबे समय से खनिज संसाधनों के जरिए औद्योगिक विकास में योगदान दिया है। अब यहां की जनता को बेहतर नागरिक सुविधाएं और मजबूत आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता में होना चाहिए।अब देखना होगा कि कलेक्टर स्तर से इस मांग पर क्या कार्रवाई होती है और आगामी DMF कार्ययोजना में बांकीमोंगरा के लिए कितना प्रावधान किया जाता है।
