संपादक विमल कुमार

बांकीमोंगरा/कोरबा। पोलियो एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो बच्चों को जीवनभर के लिए दिव्यांग बना सकती है। इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है पोलियो की दो बूंद दवा। यही कारण है कि सरकार द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाया जाता है, ताकि देश का कोई भी बच्चा इस बीमारी का शिकार न हो।स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को, चाहे वह पहले कई बार पोलियो की दवा पी चुका हो, फिर भी हर पोलियो अभियान में पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाएं। बार-बार दी जाने वाली यह खुराक बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है और उन्हें पोलियो वायरस से सुरक्षित रखती है।पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलती है। इसके कारण बच्चों के हाथ-पैर हमेशा के लिए कमजोर या निष्क्रिय हो सकते हैं। एक छोटी-सी लापरवाही बच्चे के पूरे भविष्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए प्रत्येक माता-पिता और अभिभावक का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को पोलियो की खुराक समय पर अवश्य दिलाएं।स्वास्थ्य विभाग की टीम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर तथा पोलियो बूथों पर बच्चों को दवा पिलाने का कार्य कर रहे हैं। अभिभावकों से अनुरोध है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने आसपास के सभी परिवारों को भी इसके प्रति जागरूक करें।याद रखें — पोलियो की दो बूंद केवल दवा नहीं, बल्कि आपके बच्चे के स्वस्थ, सुरक्षित और सुनहरे भविष्य की गारंटी है।आइए, मिलकर संकल्प लें— “हर बच्चा, हर बार पोलियो की दो बूंद जरूर पिए।””दो बूंद जिंदगी की – हर बच्चे के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी।””पोलियो मुक्त भारत के निर्माण में अपना सहयोग दें और 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाएं।”
