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छत्तीसगढ़ जिला कोरबा ज्ञानभारतम् मिशन के सर्वेक्षण में मिली 16वीं शताब्दी की कल्चुरीकालीन 400 वर्ष पुरानी पांडुलिपि*

by Vimal Kumar
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संपादक विमल कुमार

*ज्ञानभारतम् मिशन के सर्वेक्षण में मिली 16वीं शताब्दी की कल्चुरीकालीन 400 वर्ष पुरानी पांडुलिपि*

कोरबा 24 मई 2026/ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम् मिशन राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत कोरबा जिले में भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु व्यापक तथा सुनियोजित कार्यवाही कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में लगातार की जा रही है। इसी क्रम में जिले को एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है।
ज्ञानभारतम् मिशन के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 23 मई 2026 को किए गए सर्वेक्षण के दौरान कोरबा के रानी रोड, पुरानी बस्ती स्थित पुराने राजमहल राजगढ़ी में 16वीं शताब्दी की कल्चुरीकालीन लगभग 400 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि का पता चला। यह अमूल्य धरोहर कोरबा की अंतिम शासिका स्वर्गीय रानी धनराज कुंवर देवी के नाती कुमार रविभूषण प्रताप सिंह (उम्र 67 वर्ष) के निवास में संरक्षित पाई गई।
सर्वेक्षण के दौरान श्रीमद्भागवत पुराण और सुखसागर बारहवां स्कंध सहित धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व की कुल 27 प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का पता लगाया गया। जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह द्वारा मौके पर ही “ज्ञानभारतम् ऐप” के माध्यम से इन सभी पांडुलिपियों का फोटो अपलोड कर उनका डिजिटल संरक्षण कर दिया गया।
इस अवसर पर श्री सिंह ने पाई गई पांडुलिपियों के ऐतिहासिक स्वरूप की पुष्टि हेतु छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार एवं भाषाविद डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र (रायपुर) से मोबाइल पर चर्चा की। डॉ. मिश्र द्वारा दी गई ऐतिहासिक जानकारी और पांडुलिपियों के संदर्भों को भी “ज्ञानभारतम् ऐप” में संग्रहित किया गया है।
जिला समन्वयक सिंह के अनुसार, स्व. रानी धनराज कुंवर देवी और स्व. जोगेश्वर प्रताप सिंह के पूर्वजों के पास पीढ़ियों से संरक्षित यह पांडुलिपि धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मोटे पुराने कागज़ पर काली स्याही से देवनागरी और संस्कृत भाषा में हस्तलिखित ये पांडुलिपियाँ अब अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं। कागज़ छूने पर टूटने लगते हैं, जिसके कारण इन्हें लंबे समय से लाल कपड़े में लपेटकर पूजा घर में सुरक्षित रखा गया था। लगभग 20 वर्ष बाद पहली बार इन्हें खोला और दिखाया गया।
श्री सिंह ने बताया कि पुराने राजपरिवार के समय में इन पांडुलिपियों का उपयोग धार्मिक आयोजनों में वाचन के लिए किया जाता था। साथ ही राजपरिवार से अंग्रेजी शासनकाल में 19वीं शताब्दी के कोलकाता छापाखाने से प्रकाशित स्कंध पुराण की लगभग 300 पृष्ठों की एक ऐतिहासिक प्रति भी प्राप्त हुई है, जो अत्यंत जर्जर अवस्था में है। इसका भी डिजिटल संरक्षण कर लिया गया है।
ज्ञानभारतम् मिशन के माध्यम से कोरबा के पुराने राजपरिवार में संरक्षित धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व की इन दुर्लभ पांडुलिपियों का राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखीकरण किया गया है। डिजिटल स्वरूप में संरक्षित ये धरोहर अब भावी पीढ़ियों के लिए सदैव उपलब्ध रहेगी और भारतीय ज्ञान परंपरा का अमूल्य हिस्सा बनी रहेगी।

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