संपादक विमल कुमार




ढपढप मे प्रारम्भ हुवा पंडित धीरेन्द्र शास्त्री की विशाल हनुमंत कथा. उमड़ा जनसैलाब, आस्था एवं भक्ति का दिखा समन्यवय
2 घंटे विलम्ब से हनुमंत कथा प्रारम्भ होने पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सर्वप्रथम क्षमा मांगी. उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ की पवन धरा भगवान राम की ननिहाल होने की वजह से हम छत्तीसगढ़ के भांजा हुवे..
प्रथम दिन सुंदरकाण्ड का वर्णन करते हुवे उन्होंने कीर्तन गाने के लिए कहा जो जोर की आवाज़ से कीर्तन गाते हैं उनके सभी पाप धूल जाते हैं..
शास्त्री जी ने कहा.. जिसमे भक्ति का भक्ति का मिलन होता है उसी का नाम ही सुंदसर कांड है..
हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुवे कहा जो दूत बनकर जाएँ और पूत बनकर आएं उसी को सुंदर कांड कहते हैं..
बंदर भी सुंदर हो सकता है जो राम जी काम करता हो.. और सुंदर भी बंदर हो सकता है जो रावण का काम करें..
रावण के मरने के समय राम से पूछा.. राम मै कद मे तुमसे बहुत बड़ा था, संपत्ति मे तुमसे बहुत बड़ा था, कद मे भी तुमसे बहुत बड़ा था, उम्र मे भी तुमसे बहुत बड़ा था, तो तुमसे कैसे हार गया…, राम ने कहा इस युद्ध मे तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ नही था और मेरा भाई मेरे साथ था..
