थाना बांकी मोंगरा के अंतर्गत आने वाला सुरकछार भैरोताल,बलगी के अहिरन नदी के सीना छल्ली कर अवैध रेत उत्खनन जोरो से फल फूल रहा है ।
वैसे ही रेत उत्खनन के नियम भी बदल गए और अब प्रदेश में 19 साल के बाद रेत खदानों के आवंटन का सिस्टम भी बदल गया हैं। खनिज विभाग पहले रेत खदानों का आवंटन सिर्फ संबंधित पंचायतों को करता था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति रेत खदान के संचालन के लिए ठेका ले सकता है। राज्य बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि पंचायतों के पास अब रेत खनन का अधिकार नहीं है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के कोई भी रसूखदार लोग अब जहां चाहे वहां रेत घाट का ठेका ले सकते हैं और बहुत से रेत घाटों को अब संचालित भी कर रहे हैं।
रेत घाटों का ठेका मिलने के बाद से अब ठेकेदार अपनी मनमानी कर नियमों को ताक में रख कर दिन के साथ रात के अंधेरों में अवैध परिवहन को अंजाम दे रहे हैं। पूरा मामला कोरबा जिला के बांकी मोंगरा के बलगी स्थित अहिरन नदी रेत घाट का है, जंहा धड़ल्ले से चल रहा अवैध रेत उत्खनन , रोजना सैकड़ो की संख्या में आती है ट्रेक्टरों की सीरीज।
एक तरफ देश मे लॉक डाउन के चलते गौर जरूरी सेवाय बंद हैं, तो वहीं ऐसे विभाग के ठेकेदार प्रशासन को आईना दिखाकर धड़ल्ले से बिना पिट पास के दिन तो दिन रात के अंधेरे में अवैध रेत परिवहन को अंजान देने में लगे हुए हैं। इन सब को देखने के बाद तो खनिज विभाग की संलिप्तता होने की बात तो सच नजर आती है।रोजाना सैकड़ो की संख्या में गाड़ी लोड कर अवैध (बिना रायल्टी) के बेधड़क ट्रेक्टरों का चलना विषय को और संदेहात्मकता कर देती है।
आखिर क्यू है खनिज विभाग मौन ?
कई बार शिकायत होने के बावजूद भी खनिज विभाग न तो जांच करने आती है और न ही
बलगी के अहिरन नदी के सीना छल्ली कर अवैध रेत उत्खनन जोरो से फल फूल रहा
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