संपादक विमल कुमार


बांकीमोंगरा। नगर के पुराने थाना परिसर के पीछे स्थित SECL के एक बंद पड़े आवासीय मकान में शनिवार दोपहर अचानक भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। घटना में डीजे, साउंड सिस्टम, लाइटिंग उपकरण, टेंट सहित लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। स्थानीय लोगों ने आगजनी के पीछे असामाजिक तत्वों की भूमिका होने की आशंका जताई है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर करीब 12:30 बजे मकान से धुआं उठता दिखाई दिया। सबसे पहले वहां खेल रहे बच्चों की नजर धुएं पर पड़ी, जिन्होंने तत्काल अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। देखते ही देखते धुएं का गुबार आग की विकराल लपटों में बदल गया और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।सूचना मिलते ही स्थानीय नागरिकों ने डायल-112 और संबंधित विभागों को घटना की जानकारी दी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। वहीं नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के कर्मचारी विद्यासागर पानी का टैंकर लेकर घटनास्थल पहुंचे। स्थानीय रहवासियों, पुलिस और नगर पालिका कर्मचारियों ने मिलकर आग बुझाने की मुहिम शुरू की। बाल्टियों और पानी के टैंकर की मदद से लगातार प्रयास किए गए, जिसके चलते आग को आसपास के मकानों तक फैलने से रोक लिया गया। लोगों की सूझबूझ और तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।जानकारी के मुताबिक जिस मकान में आग लगी, उसका उपयोग एक लाइट एवं साउंड व्यवसायी द्वारा गोदाम के रूप में किया जा रहा था। यहां डीजे सेट, साउंड सिस्टम, लाइटिंग उपकरण, टेंट सामग्री तथा आयोजन में उपयोग होने वाले अन्य महंगे सामान रखे गए थे। आग की चपेट में आने से लगभग 5 लाख रुपये से अधिक मूल्य की सामग्री पूरी तरह नष्ट हो गई। आग इतनी भीषण थी कि अधिकांश सामान को बाहर निकालने का अवसर तक नहीं मिल पाया।घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंद पड़े मकान में अचानक आग लगना कई सवाल खड़े करता है। कुछ नागरिकों ने आशंका जताई है कि यह सामान्य हादसा न होकर किसी असामाजिक तत्व की करतूत भी हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में अग्निशमन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि हमेशा की तरह इस बार भी फायर ब्रिगेड की टीम तब पहुंची जब अधिकांश सामान जलकर राख हो चुका था। नागरिकों का कहना है कि बांकीमोंगरा और आसपास के क्षेत्रों में फायर स्टेशन की दूरी अधिक होने के कारण आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर सहायता नहीं मिल पाती, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और स्थिति सामान्य है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि लाखों रुपये की संपत्ति के नुकसान से व्यवसायी को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। अब पूरे मामले में पुलिस जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि यह महज एक दुर्घटना थी या फिर इसके पीछे किसी की सुनियोजित साजिश छिपी हुई है।
